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हसदेव अरण्य कांड: कटाई चालू, आंदोलन तेज; कांग्रेस और बीजेपी के वादों का क्या हुआ?

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हसदेव अरण्य कांड  कटाई चालू  आंदोलन तेज  कांग्रेस और बीजेपी के वादों का क्या हुआ
सीएम विष्णुदेव साय, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव

Hasdeo Arand News- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित जैव विविधता संपन्न हसदेव अरण्य क्षेत्र में भारी विरोध के बीच वन विभाग ने परसा पूर्व केते बासन (पीईकेबी) कोयला खदान परियोजना के दूसरे चरण के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है. इसे लेकर कांग्रेस ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर हमला बोला है. पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आंदोलनकारियों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आदिवासियों के हितों की रक्षा करने की अपील की है. जबकि सीएम साय ने इस पूरी कार्रवाई को कांग्रेस का किया धरा करार दिया है. लेकिन सवाल अब ये भी उठने लगे हैं कि विधानसभा के उस प्रस्ताव का क्या हुआ जिसमें दोनों ही दलों ने हसदेव में सभी कोल ब्लॉक रद्द करने के लिए सहमति दी थी. साथ ही बीजेपी ने चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में हसदेव को बचाने के सबंध में तब की कांग्रेस सरकार के रवैये को धोखा करार दिया था.

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अब मौजूदा विपक्षी कांग्रेस ने यह मुद्दा न सिर्फ विधानसभा में उठाया बल्कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिंहदेव आंदोलनकारियों के बीच भी पहुंच गए. विधानसभा में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर उद्योगपतियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया.

बता दें कि वन विभाग ने गुरुवार सुबह सरगुजा जिले के उदयपुर विकास खंड में पीईकेबी चरण 2 के लिए पेड़ों की कटाई शुरू कर दी. इस दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया.

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विधानसभा चुनाव से पहले भी हसदेव अरण्य का मामला जोर-शोर से उठता रहा है. हालांकि इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे को कुसूरवार ठहराते रहे हैं. इस मुद्दे की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र ‘मोदी की गारंटी’ में हसदेव अरण्य के परसा में कोयला खनन की अनुमति को धोखा कहा था. वहीं साल 2022 में 26 जुलाई को छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया कि हसदेव में सभी कोल ब्लॉक रद्द किए जाएं. इसके बावजूद अब वनों की कटाई को लेकर हुई ताजा कार्रवाई से यहां के आदिवासियों में चिंताएं गहरा गई हैं.

सिंहदेव पहुंचे हसदेव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव सोमवार को 500 दिनों से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे. यहां उन्होंने आदिवासियों के साथ खड़े रहने का वादा किया. वहीं इसे लेकर उन्होंने एक्स पर पोस्ट भी किया है. इसमें उन्होंने लिखा है, “हसदेव अरण्य में कोयला उत्खनन के उद्देश्य से जंगलों को उजाड़ने के विरोध में संघर्ष कर रहे उस क्षेत्र के मूलनिवासी आदिवासी भाई-बहनों एवं ग्रामीणों से मुलाकात की.” उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक विरोध करना हमारे आदिवासी भाई बहनों का अधिकार है, मगर जिस तरीके से पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र के आदिवासी सरपंचों और वरिष्ठजनों को गिरफ्तार किया है, उन्हें कपड़े तक पहनने का मौका नहीं दिया, यह पूर्ण रूप से असंवैधानिक है. सरकार को उनकी बात तत्काल सुननी चाहिए और उनकी इच्छानुसार ही आगे का कोई कदम उठाना चाहिए.

सिंहदेव ने साय से क्या कहा?

अपने पोस्ट में सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी स्वयं सरगुजा संभाग के आदिवासी समुदाय से आते हैं- उनसे अपेक्षा है कि वो प्रदर्शनकारियों की बात सुनेंगे. जिस समुदाय से आगे आ कर उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका मिला है, कम से कम उनके हितों की रक्षा करें.


उन्होंने आगे कहा, “हसदेव अरण्य और हमारे आदिवासी भाई-बहनों के जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए मैं हमेशा प्रतिबद्ध रहा हूं और आगे भी उनके कंधे से कंधा मिला कर लड़ता रहूंगा.”

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने घेरा

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह मामला उठाया था. इस दौरान उन्होंने कहा, “पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है (हसदेव क्षेत्र में) और 30,000 पेड़ काटे गए हैं. पेड़ काटने का विरोध कर रहे आदिवासियों को गिरफ्तार कर लिया गया. हमारी (बघेल) सरकार के समय हसदेव को बचाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था. हम चाहते हैं कि सरकार हसदेव को बर्बाद होने से रोके. गरीबों की जमीन और जंगल (उद्योगपतियों को) मत सौंपें.''

साय ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे लेकर कांग्रेस को निशाने पर लिया. साय ने कहा कि पेड़ों के कटाई की अनुमति कांग्रेस की सरकार थी, तब दी गई थी. पहले जो भी काम हुए, चाहे वह पेड़ों की कटाई हो या अन्य कांग्रेस सरकार की अनुमति से हो रहा है. वहीं इससे पहले जब विधानसभा मामला उठा तो विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से उन्होंने कहा था कि उन्हें लोगों के (वनों की कटाई के खिलाफ) विरोध की जानकारी मिली है लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. हालांकि कांग्रेस और हसदेव आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि यहां कई आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी हुई है.

क्या है मामला?

राज्य सरकार ने पीईकेकेबी फेज- II खदान (सरगुजा) के लिए 1,136.328 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी इस्तेमाल की अनुमति दी थी, जिसे पिछले साल राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को आवंटित किया गया था.

आरवीयूएनएल को 2007 में आवंटित पीईकेबी ब्लॉक में 762 हेक्टेयर भूमि पर खनन का पहला चरण साल 2013 में शुरू हुआ और पूरा हो चुका है. लेकिन हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले स्थानीय ग्रामीण कई सालों से इन खदानों के आवंटन का विरोध कर रहे थे. फिलहाल वे लगभग 500 दिनों से धरना दे रहे हैं.

वन विभाग ने इससे पहले भी पीईकेबी फेज-2 कोयला खदान की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करने के लिए पेड़ काटने की कवायद शुरू करने का प्रयास किया था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिससे अधिकारियों को अपनी कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा.

वनों की कटाई और खनन पर रोक लगाने की मांग

हसदेव अरण्य में इन कोयला खदानों के आवंटन का विरोध कर रहे छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन (सीबीए) के संयोजक आलोक शुक्ला ने छत्तीसगढ़ Tak से कहा कि विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने मिलकर संकल्प पारित किया था "हसदेव अरण्य को खनन मुक्त रखा जाए. ऐसे में यहां कोई खनन या कोई कटाई नहीं होनी चाहिए. उस प्रस्ताव का पालन करना चाहिए."

शुक्ला ने आगे कहा कि पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों की संवैधानिक ग्रामसभाओं ने भी कोयला खनन का विरोध किया है. विधानसभा के संकल्प और ग्रामसभा के निर्णय पर खनन परियोजना निरस्त हो. उन्होंने यहां चल रहे वनों की कटाई के अभियान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.

वहीं दूसरी ओर गुरुवार को कांग्रेस ने रायपुर में प्रदर्शन किया. पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया. बहरहाल, अब विरोध, धरना, आंदोलन के बीच गेंद बीजेपी के पाले में है. सीएम विष्णुदेव साय कैसे इस विवाद को शांत करते हैं यह देखने वाली बात है.

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